बींइग अनमैरिड

काफी लंबे समय से एक चलन सा आम हो गया है , शादी न करने का । अच्छी बात है व्यक्तिगत मामला है ये ,तो अगर कोई शादी न करने का निर्णय लेता है इससे अन्य किसी को समस्या नहीं होना चाहिए और आजकल वास्तव में कोई इस बात पर ध्यान देता भी नहीं कि अमुक व्यक्ति ने शादी क्यों नहीं की आदि।

अब अगर किसी ने निर्णय लिया कि उसे शादी नहीं करनी तो इससे किसी को क्या लेना देना? वैसे ही जिसने शादी नहीं की उसे भी अन्य शादीशुदा लोगों पर कटाक्ष करने का कोई कारण नहीं बनता।

ये जो स्वइच्छा से अविवाहित रहने वाले लोग हैं वो ऐसा समझते हैं और जाहिर भी करते हैं कि उन्होंने शादी न करके समाज पर बड़ा एहसान किया है । वो अपनी सेवाएं व पूरा समय समाज को समर्पित करते हैं । क्योंकि उन्होंने शादी नहीं की तो बच्चे भी नहीं होंगे इस तरह से वो जनसंख्या नियंत्रण में भी योगदान कर रहे हैं ।

तो ये जो भी लोग हैं या तो स्वयं गलतफहमी में हैं या सामने वालों को वेबकूफ समझते हैं।आपने शादी नहीं की क्योंकि आपको कोई ऐसा नहीं मिला जो आपके मापदंडों पर खरा उतरता या आपमें समझौता करने की क्षमता नहीं या फिर आप सिर्फ अपने लिए ही जीना जानते हैं दूसरे की जिम्मेदारी लेना आपके बस की बात नहीं । या आप पूर्ण स्वतंत्रता के समर्थक हैं और शादी करने से बंधन में रहना ही होता है जो आप नहीं रह सकते । कहीं न कहीं आप असक्षम हैं अपने एक ढर्रे से बाहर निकलने में।

अब अगर बात करें जेंडर की तो अधिकतर पुरुष ये निर्णय अधिक लेते हैं, हालांकि महिलाएं भी होती हैं पर अधिकांशतः चालीस की उम्र तक आते आते अपना निर्णय बदल लेती हैं और पारिवारिक जीवन इन्हें रास आने लगता है।

पुरुष अधिकतर मानते हैं कि महिलाएं उनके लिए नहीं है या वो महिलाओं के नखरे नहीं उठा सकते । अब जब आपने शादी की ही नहीं तो आप कैसे कह सकते हैं कि औरतें नखरेबाज होती हैं ? ऐसे लोगों के जेहन में कहीं न कही उनके अपने माँ पिता का जीवन भी रहता होगा जो किन्हीं कारणों से खुशहाल न रहा पर इसका मतलब ये बिल्कुल नहीं कि सभी के साथ ऐसा ही होगा। शादी न करके आप बहुत सी जिम्मेदारियों और जबाबदेही से बच जाते हैं पर साथ ही आप कभी भी पितृऋण से मुक्त नहीं हो पाते ।

पितृऋण, नहीं जानते? आप क्यों जानेंगे भई आपका तो अपना जीवन और अलग ही सिद्धांत भी तो हैं। आपको इन बेकार के पचड़ों को क्यों जानना? तो पितृऋण वह ऋण होता है जो हमारे जन्म लेते ही हमारे पर आ जाता है और जब हम संतान पैदा करते हैं तब उस ऋण से उऋण होते हैं । अब आपने तो शादी ही नहीं की तो बच्चे कैसे होंगे ?इसलिए आप कभी भी इससे उऋण नहीं हो पाएंगे।

तो कहने का निहितार्थ बस इतना है कि हर व्यक्ति जो भी निर्णय लेता है वह बहुत सोच समझकर अपनी क्षमताओं, आवश्यकताओं और अपने जीवन को देखते हुए लेता है । कोई भी व्यक्ति वर्तमान में जो निर्णय लेता है उसके नजरिए से वो गलत नहीं होता क्योंकि अगर गलत होगा तो वह उस निर्णय को लेगा ही क्यों?अब भविष्य में वह निर्णय सही साबित होगा या गलत ये तो पहले से कोई नहीं कह सकता । तो जो शादीशुदा हैं और जिनका इस विधा में विश्वास है न तो वो गलत हैं और न ही वो गलत हैं जिन्होंने शादी नहीं की ।पर किसी ने भी समाज पर एहसान नहीं किया है आपने अपना निर्णय अपनी खुशी से अपने सिद्धांतों और जरूरत के अनुरूप लिया है ।

आपके विचार भी आमन्त्रित हैं इस विषय पर।

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